उर्दू शायरी · ग़ज़ल

isi jagah yahin ai baghban banaenge

इसी जगह यहीं ऐ बाग़बाँ बनाएँगे

اسی جگہ یہیں اے باغباں بنائیں گے

शायर: Jaleel Nomani Rampuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इसी जगह यहीं ऐ बाग़बाँ बनाएँगे
जलेगा एक तो सौ आशियाँ बनाएँगे

ख़िरद को हम ने ही शाइस्तगी सिखाई थी
हमीं ख़िरद को जुनूँ की ज़बाँ बनाएँगे

जला के मश'अल-ए-पिंदारी-ए-सहर-गाही
नज़र को दुश्मन-ए-ख़्वाब-ए-गिराँ बनाएँगे

सितम को उन के मुक़द्दर बना लिया हम ने
इसी को रहबर-ए-कार-ए-जहाँ बनाएँगे

अगर रहे यही हालात कुछ दिनों सय्याद
हम एक और नया गुल्सिताँ बनाएँगे