उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya ke gham hue to pareshan nahin hue

दुनिया के ग़म हुए तो परेशाँ नहीं हुए

دنیا کے غم ہوئے تو پریشاں نہیں ہوئے

शायर: Jaleel Nomani Rampuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया के ग़म हुए तो परेशाँ नहीं हुए
जब तुम शरीक-ए-गर्दिश-ए-दौराँ नहीं हुए

हर पर्दा था मिज़ाज-शनास-ए-निगाह-ए-शौक़
हम जल्वा-गाह-ए-नाज़ में हैराँ नहीं हुए

आदाब-ओ-एहतियात हैं मजबूरियों के नाम
हम कब तिरे बग़ैर परेशाँ नहीं हुए

वो अश्क-हा-ए-ग़म कि जो आँखों में रह गए
वो दाग़-हा-ए-दिल जो नुमायाँ नहीं हुए

अल्लह रे ए'तिमाद-ए-निगाह-ए-जुनूँ-नवाज़
अच्छा हुआ कि जैब-ओ-गरेबाँ नहीं हुए

राज़-ए-शिकस्त-ए-'इश्क़ बहुत दूर की है बात
हम ख़ुद हरीफ़-ए-जल्वा-ए-जानाँ नहीं हुए

ये हाल और इस पे बुतों की नवाज़िशें
अब तक 'जलील' आप मुसलमाँ नहीं हुए