उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi rang-e-sham se mutmain to koi numud-e-sahar se KHush

कोई रंग-ए-शाम से मुतमइन तो कोई नुमूद-ए-सहर से ख़ुश

کوئی رنگ شام سے مطمئن تو کوئی نمود سحر سے خوش

शायर: Jaleel Nomani Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई रंग-ए-शाम से मुतमइन तो कोई नुमूद-ए-सहर से ख़ुश
मैं फ़िदा-ए-गिर्या-ए-नीम-शब कि हूँ अपने दीदा-ए-तर से ख़ुश

न ग़रज़ किसी से न वास्ता मिरी राह है मिरा रास्ता
कि मैं गुम हूँ अपनी तलाश में हूँ मैं अपनी राह-गुज़र से ख़ुश

वो हो उन का नाज़ कि हो अदा न कोई है ख़ुश न कोई ख़फ़ा
मगर एक शाम-ए-फ़िराक़ है कि जो मुझ से ख़ुश मिरे घर से ख़ुश

न क़ुसूर-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर खुला न ख़ता-ए-तीर-ए-नज़र खुली
न मैं अपने ज़ख़्म-ए-जिगर से ख़ुश न वो अपने तीर-ए-नज़र से ख़ुश

न है मुझ को ख़ौफ़-ए-शब-ए-अलम न है फ़िक्र-ए-ज़ुल्मत-ए-शाम-ए-ग़म
मुझे क्या ग़रज़ मह-ओ-मेहर से मैं हूँ अपने दाग़-ए-जिगर से ख़ुश

ऐ 'जलील' ज़ाहिद-ए-ख़ुश्क से मिरी राह मंज़िलों दूर है
कि पसंद है उसे आइना मिरा दिल है आइना-गर से ख़ुश