उर्दू शायरी · ग़ज़ल

umr aadhi ishq ki wo yun ganwata rah gaya

'उम्र आधी 'इश्क़ की वो यूँ गँवाता रह गया

عمر آدھی عشق کی وہ یوں گنواتا رہ گیا

शायर: Parul Singh Noor5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'उम्र आधी 'इश्क़ की वो यूँ गँवाता रह गया
बेवफ़ा कह कर मुझे बस आज़माता रह गया

शौक़ से तस्वीर जिस की खींचते रहते थे सब
तीर खा के वो परिंदा फ़ड़फ़ड़ाता रह गया

पूछ डाला जब किसी ने हँसने रोने का सबब
नाम तेरा इन लबों पे आता आता रह गया

क्या किया है आज तक ये कह दिया है उस ने आज
बाप जिस बेटे की ख़ातिर बस कमाता रह गया

जा रहा है सामने से हाथ थामे ग़ैर का
और मैं पागल उसे अपना बताता रह गया