उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nasl ye jo rab se minnat mangti hai

नस्ल ये जो रब से मिन्नत माँगती है

نسل یہ جو رب سے منت مانگتی ہے

शायर: Parul Singh Noor5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नस्ल ये जो रब से मिन्नत माँगती है
थोड़ी मेहनत भी तो क़िस्मत माँगती है

चुभती है आज़ादियाँ उस की जहाँ को
जब इक औरत हक़ की दौलत माँगती है

इक वफ़ा दो लफ़्ज़ तेज़ी यार की सी
कुछ ज़ियादा कब मोहब्बत माँगती है

हक़ था बाबा पे ना थी जब तक बियाही
आने को घर अब इजाज़त माँगती है

दिन गए जब रूह का रिश्ता थी चाहत
अब मोहब्बत भी नज़ाकत माँगती है