उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham churaate ro paDe the

ग़म चुराते रो पड़े थे

غم چراتے رو پڑے تھے

शायर: Parul Singh Noor10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म चुराते रो पड़े थे
हम हँसाते रो पड़े थे

जो ग़ज़ल थी नाम तेरे
गुनगुनाते रो पड़े थे

हँस रहे थे काफ़ी दिन से
मुस्कुराते रो पड़े थे

दूर से कहते थे ख़ुश हैं
पास आते रो पड़े थे

आग दिल की थी बुझानी
ख़त जलाते रो पड़े थे

हिज्र में ये सब सितारे
झिलमिलाते रो पड़े थे

बढ़ गया था दर्द हद से
हँसते गाते रो पड़े थे

शहर ख़ुशियाँ खा गया था
गाँव जाते रो पड़े थे

'इश्क़ का था इम्तिहाँ वो
आज़माते रो पड़े थे

सोच कैसा वाक़ि'आ था
दिल दुखाते रो पड़े थे