उर्दू शायरी · ग़ज़ल

do dil wo sang sang dhaDakte hain aaj bhi

दो दिल वो संग संग धड़कते हैं आज भी

دو دل وہ سنگ سنگ دھڑکتے ہیں آج بھی

शायर: Parul Singh Noor6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दो दिल वो संग संग धड़कते हैं आज भी
खिड़की से चोरी चोरी वो तकते हैं आज भी

कहता है कौन 'इश्क़ के लहजे बदल गए
कंगन कलाइयों में खनकते हैं आज भी

करता है कोई साज़िशें वर्ना यूँही नहीं
आँचल घड़ी में इक दो अटकते हैं आज भी

इतनी है पाक 'इश्क़ की ये दास्ताँ सुनो
आने में वो क़रीब झिजकते हैं आज भी

ख़्वाबों से अब तलक तिरी सूरत नहीं गई
उठ उठ के रात-भर को सिसकते हैं आज भी

नीची निगाह उठती है आते ही 'नूर' के
या'नी शरीफ़ लोग बहकते हैं आज भी