उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ummidon ko aag lagae rasta khole baiTha hun

उम्मीदों को आग लगाए रस्ता खोले बैठा हूँ

امیدوں کو آگ لگائے رستہ کھولے بیٹھا ہوں

शायर: Dawood Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उम्मीदों को आग लगाए रस्ता खोले बैठा हूँ
मेरा 'इश्क़ उसे पिंजरा था पिंजरा खोले बैठा हूँ

चाहे मुझ को शा'इर बोलो चाहे मुझ को दीवाना
हाथ में कुछ ग़ज़लों को थामे माथा खोले बैठा हूँ

वो अब जाने किस की ख़ातिर ज़ुल्फ़ें खोले फिरती है
मैं अब जाने किस की ख़ातिर सीना खोले बैठा हूँ

दिल कोई कश्कोल है थोड़ी जो ख़ैरात से भर जाए
कुल ईमान समेटे आओ का'बा खोले बैठा हूँ

कौन ख़ुदा तारीख़ से लड़ कर ख़ौफ़ का बाब निकालेगा
ख़ून से लत-पत लाश पे बैठा बस्ता खोले बैठा हूँ

हाए क्या तूफ़ान छुपा फिरता था मेरी नस नस में
एक कलाई काट के बहता दरिया खोले बैठा हूँ