उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aasman oDhe hue su-e-zamin hota hai

आसमाँ ओढ़े हुए सू-ए-ज़मीं होता है

آسماں اوڑھے ہوئے سوئے زمیں ہوتا ہے

शायर: Dawood Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आसमाँ ओढ़े हुए सू-ए-ज़मीं होता है
'ईद का चाँद सितारों में नहीं होता है

बा'ज़ औक़ात तुझे देख के जी उठते हैं
बा'ज़ औक़ात तो ऐसा भी नहीं होता है

तुम को इस ख़ाना-ए-वहशत में ख़ुदा ले आया
शौक़ से कौन मिरे दिल का मकीं होता है

हिज्र में आँख के आँसू भी दु'आ होते हैं
शौक़ में रश्क भी सज्दे की जबीं होता है

जब से पहना है इन आँखों पे बसीरत का लिबास
वो भी दिखता है जो मुमकिन ही नहीं होता है

हम ने देखी हैं वो बिखरी हुई साहिर ज़ुल्फ़ें
हम से पूछो कि ये ग़म कितना हसीं होता है