उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab is liye bhi dasht mein aata nahin koi

अब इस लिए भी दश्त में आता नहीं कोई

اب اس لیے بھی دشت میں آتا نہیں کوئی

शायर: Dawood Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब इस लिए भी दश्त में आता नहीं कोई
टूटे दिलों का सोग मनाता नहीं कोई

हर दिन तिरी गली का पता पूछता हूँ मैं
हर दिन मैं पूछता हूँ बताता नहीं कोई

दिल भी शिकस्ता क़ब्र पे रक्खे दिए सा है
इक बार बुझ गया तो जलाता नहीं कोई

डर है उन्हें कहीं मैं तमाशा बना न दूँ
मेरा वुजूद ढूँढ़ के लाता नहीं कोई

क़िबला बदल के उस की तरफ़ चल पड़ा हूँ मैं
अंधे को रास्ता भी दिखाता नहीं कोई

हर एक रम्ज़ आप की आँखों में क़ैद है
इतना समुंदरों में समाता नहीं कोई