उर्दू शायरी · ग़ज़ल

misl-e-fanus gul-andam ko raushan karne

मिस्ल-ए-फ़ानूस गुल-अंदाम को रौशन करने

مثل فانوس گل اندام کو روشن کرنے

शायर: Dawood Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिस्ल-ए-फ़ानूस गुल-अंदाम को रौशन करने
कोई याद आती है इल्हाम को रौशन करने

अपनी आँखों ने वहाँ सख़्त अंधेरे झेले
लोग आते हैं जहाँ नाम को रौशन करने

इक मोहब्बत कि किसी दश्त में वीरान हुई
एक सीता कि चली राम को रौशन करने

वो मुझे प्यार से कहती है कि जा रौशन कर
मैं निकल पड़ता हूँ हर बाम को रौशन करने

माँ ने कुछ विर्द सिखाए थे और इक नाद-ए-'अली
नूर आता है मिरे नाम को रौशन करने

'दाऊद' इस फूल की क़ुर्बत में मुझे रंग मिले
ख़ास आते हैं किसी 'आम को रौशन करने