उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek KHushi ba’is-e-taKHir paDi rahti hai

इक ख़ुशी बा’इस-ए-ताख़ीर पड़ी रहती है

اک خوشی باعث تاخیر پڑی رہتی ہے

शायर: Dawood Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक ख़ुशी बा’इस-ए-ताख़ीर पड़ी रहती है
जैसे बंजर कोई जागीर पड़ी रहती है

अव्वल अव्वल तिरी पायल की छनक होती थी
अब जहाँ दर्द की ज़ंजीर पड़ी रहती है

मेरे कमरे में ख़ुदा रहता है मैं रहता हूँ
तीसरी आप की तस्वीर पड़ी रहती है

सिसकियाँ लौट के ख़ेमों को चली जाती हैं
बे-रिदा आयत-ए-ततहीर पड़ी रहती है

हम को झुकने नहीं देती कभी दस्तार-ए-'अली
पाँव के पाँव में तक़दीर पड़ी रहती है

आसमाँ वाला मिरे दिल का मकीं है 'सय्यद'
और बयाबाँ में मिरी हीर पड़ी रहती है