उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum do nam mila kar likkha karte the

हम दो नाम मिला कर लिक्खा करते थे

ہم دو نام ملا کر لکھا کرتے تھے

शायर: Dawood Syed7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम दो नाम मिला कर लिक्खा करते थे
पेड़ हरे रहते थे साया करते थे

तोहफ़े में उस सम्त से लाशें आई हैं
जिस जानिब गुल-दस्ते भेजा करते थे

ऐसा वक़्त भी था तस्वीर की सूरत हम
सीने से दीवार लगाया करते थे

कुछ ऐसा इबहाम था दीन और दुनिया में
रात के काफ़िर सुब्ह को सज्दा करते थे

जाते थे तो क़ब्र की मिट्टी रोकती थी
रुकते थे तो ख़्वाब डराया करते थे

दिल कब ऐसी वीरानी का 'आदी था
हम ही इस का ध्यान बटाया करते थे

साल में इक यारों का मेला सजता था
सारे अपने ज़ख़्म दिखाया करते थे