उर्दू शायरी · ग़ज़ल

TuTe hue paron se parwaz kar rahe hain

टूटे हुए परों से परवाज़ कर रहे हैं

ٹوٹے ہوئے پروں سے پرواز کر رہے ہیں

शायर: Ganesh Gaikwad Aaghaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

टूटे हुए परों से परवाज़ कर रहे हैं
हम फिर नए सफ़र का आग़ाज़ कर रहे हैं

सच बोलने लगे हैं जब से ज़बाँ मिली है
हर शख़्स का यहाँ हम ए'ज़ाज़ कर रहे हैं

आईना पढ़ लिया है इस बार हम सभी ने
ख़ामोश थे जो कल तक आवाज़ कर रहे हैं

बेज़ार हो रहा है जिस दर्द से ज़माना
उस दर्द को हम अपना दम-साज़ कर रहे हैं

मुस्कान के लिए भी मजबूर हो गए हम
किस बात पर न जाने फिर नाज़ कर रहे हैं

बदनाम कर दिया है कुछ दोस्तों ने जब से
हम दुश्मनों को अपना हमराज़ कर रहे हैं