उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tufan ban ke gardish-e-dauran thi raat bhar

तूफ़ान बन के गर्दिश-ए-दौराँ थी रात भर

طوفان بن کے گردش دوراں تھی رات بھر

शायर: Zafar Mirzapuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तूफ़ान बन के गर्दिश-ए-दौराँ थी रात भर
बज़्म-ए-तख़य्युलात परेशाँ थी रात भर

हर फूल हर रविश पे उदासी 'अजीब थी
जाने कहाँ बहार-ए-गुलिस्ताँ थी रात भर

हाँ तेरे इंतिज़ार में बे-कैफ़ सी रही
आँगन में चाँदनी मिरी मेहमाँ थी रात भर

बस्ती तबाह कर के वो दिन में चला गया
लेकिन दिलों में हैबत-ए-तूफ़ाँ थी रात भर

हालात ने ज़माने को दुश्मन किया तो क्या
ख़ुद मुझ से मेरी नींद गुरेज़ाँ थी रात भर

मैं दोस्तों के साथ 'ज़फ़र' कितना ख़ुश रहा
लेकिन उदास राह-ए-शबिस्ताँ थी रात भर