उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu puchhega to sarasar bura lagega dost

तू पूछेगा तो सरासर बुरा लगेगा दोस्त

تو پوچھے گا تو سراسر برا لگے گا دوست

शायर: Faiyyaz Bostan8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू पूछेगा तो सरासर बुरा लगेगा दोस्त
कोई भी तेरे बराबर बुरा लगेगा दोस्त

तू आ रहा हो तो फिर दर 'अज़ीज़ होगा मुझे
तू जा रहा हो तो फिर दर बुरा लगेगा दोस्त

तुझे पसंद न आएगा मेरे बा'द ये शह्र
मुझे भी गाँव का चक्कर बुरा लगेगा दोस्त

इसी सबब से कि देखा नहीं है सुब्ह तुझे
तमाम दिन मुझे दफ़्तर बुरा लगेगा दोस्त

हमारे बा'द सफ़र-ज़ाद भाएँगे तुझ को
हमारे बा'द तुझे घर बुरा लगेगा दोस्त

तू फूल है तुझे भाएँगे तोड़ने वाले
मैं पेड़ हूँ मुझे पत्थर बुरा लगेगा दोस्त

जबीन-ओ-जामा तो जचते हैं पुर-शिकन के बग़ैर
बुरा लगेगा तो बिस्तर बुरा लगेगा दोस्त

दु'आ-ए-वस्ल में मेरे शरीक-ए-कार रहो
वगर्ना हिज्र में जी कर बुरा लगेगा दोस्त