उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu humse mil to tujhko haal-e-dil apna suna Dalen

तू हम से मिल तो तुझ को हाल-ए-दिल अपना सुना डालें

تو ہم سے مل تو تجھ کو حال دل اپنا سنا ڈالیں

शायर: Parveen Shaghaf6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू हम से मिल तो तुझ को हाल-ए-दिल अपना सुना डालें
कहे तो जाम में ख़ून-ए-जिगर अपना मिला डालें

तरस खा मुझ पे और वक़्त-ए-जुनूँ यूँ न रुला मुझ को
वगरना आँसुओं से अपने तेरा ग़म जला डालें

हवासों में हमारे उस को अब तो ज़िंदा रहने दे
कहीं ऐसा न हो हर लम्हा ख़ुशियाँ हम भुला डालें

बदलने के लिए क्यों रंग तुझ को इतनी उजलत है
हमें डर है निशान-ए-मिस्ल तेरी हम मिटा डालें

जगा रक्खा है नींदों को हमारी जाने बरसों से
तो हो सकता है ख़्वाबों को ही तेरे हम सुला डालें

समेटा है तुझे ख़ुद में हमेशा फूलों की मानिंद
कहीं ऐसा न हो ज़ख़्मों को तेरे हम खिला डालें