उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq mein aisa ek maqam bhi ho

इश्क़ में ऐसा इक मक़ाम भी हो

عشق میں ایسا اک مقام بھی ہو

शायर: Parveen Shaghaf5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ में ऐसा इक मक़ाम भी हो
ख़ामुशी जिस में हम-कलाम भी हो

ऐसा अफ़्साना कोई लिखा जाए
जिस में लिक्खा मिरा पयाम भी हो

क्यों नज़र-बंद हों बयाँ मेरे
कुछ बयाँ मेरे ख़ास-ओ-आम भी हो

दिल-ए-नादाँ ज़रा अदब से धड़क
प्यार का थोड़ा एहतिराम भी हो

गुल-ए-ताज़ा की तरह महके 'शग़फ़'
पत-झड़ों में कोई वो शाम भी हो