उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lab ko tere mai-kashi de jaungi

लब को तेरे मय-कशी दे जाऊँगी

لب کو تیرے مے کشی دے جاؤں گی

शायर: Parveen Shaghaf7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लब को तेरे मय-कशी दे जाऊँगी
और ज़बाँ को शायरी दे जाऊँगी

यूँ नज़र-अंदाज़ न कर हमनशीं
तेरी पलकों पर नमी दे जाऊँगी

रास न आएगी तुझ को बज़्म-ए-ख़ास
अंजुमन को वो कमी दे जाऊँगी

ख़ाली होगा दिल का जब कश्कोल तब
मैं अना को मुफ़लिसी दे जाऊँगी

तू बज़ाहिर होगा इक दानिश मगर
क़ैस सी दीवानगी दे जाऊँगी

काश तू होता तजस्सुस-आश्ना
रूह को मैं तिश्नगी दे जाऊँगी

तेरे महवर का क़मर बन कर 'शग़फ़'
मैं सदा की तीरगी दे जाऊँगी