उर्दू शायरी · ग़ज़ल

go kisi ka pyar hun dastar hun iman hun

गो किसी का प्यार हूँ दस्तार हूँ ईमान हूँ

گو کسی کا پیار ہوں دستار ہوں ایمان ہوں

शायर: Parveen Shaghaf5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गो किसी का प्यार हूँ दस्तार हूँ ईमान हूँ
अपने घर में मैं मगर बेकार सा सामान हूँ

शीशागर तू ने नफ़ासत से तराशा है मुझे
क्या ख़बर तुझ को कि अब पत्थर का इक मैदान हूँ

कोई पढ़ता है मुझे शाम-ओ-सहर यूँ बा-वज़ू
और किसी के वास्ते सादा सा इक फ़रमान हूँ

चल रही हूँ हौले हौले चाँद की मानिंद मैं
ये भी सच है कहकशाँ का एक रौशन-दान हूँ

है पहननी ख़ाक की निखरी क़बा इक दिन 'शग़फ़'
आख़िरी दिन का अभी से देखिए सामान हूँ