उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab talak Thahri hui hai zindagi apni jagah

अब तलक ठहरी हुई है ज़िंदगी अपनी जगह

اب تلک ٹھہری ہوئی ہے زندگی اپنی جگہ

शायर: Parveen Shaghaf6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तलक ठहरी हुई है ज़िंदगी अपनी जगह
मुझ से कब हँस कर मिली है ज़िंदगी अपनी जगह

आँसुओं को ले के आँखों में कभी मुस्काती है
और कभी गुल सा खिली है ज़िंदगी अपनी जगह

दश्त-ए-सहरा में गुज़र का कोई पैमाना नहीं
वहशतों की आगही है ज़िंदगी अपनी जगह

देख लो कितना फ़रेबी है शिकारी की ये चाल
यूँ बिसातों सी बिछी है ज़िंदगी अपनी जगह

नींद से बेदार होते ही हुई रोटी की चाह
आँचलों में सो गई है ज़िंदगी अपनी जगह

वस्ल पल-भर का 'शग़फ़' देता है फ़ुर्क़त 'उम्र की
दर्द-ए-दिल में खो गई है ज़िंदगी अपनी जगह