उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aashnai ka dam bhi bharte ho

आश्नाई का दम भी भरते हो

آشنائی کا دم بھی بھرتے ہو

शायर: Parveen Shaghaf4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आश्नाई का दम भी भरते हो
हम-कलामी से इतना डरते हो

दिल के गोशे में है छुपाया मुझे
गुफ़्तुगू करते कितना डरते हो

मेरा ही ख़्वाब देखने वाले
मुझ से बच बच के क्यों गुज़रते हो

चाहे इक़रार हो कि हो इंकार
इश्क़ की राह से गुज़रते हो