उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu dua kar ki mere dil se tera gham nikle

तू दु'आ कर कि मिरे दिल से तिरा ग़म निकले

تو دعا کر کہ مرے دل سے ترا غم نکلے

शायर: Daniyal Haider Jafri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू दु'आ कर कि मिरे दिल से तिरा ग़म निकले
इस से पहले कि मिरी जान मिरा दम निकले

बख़्श देता वो ख़ता ख़ुल्द में रहने देता
पर ख़ुदा ने यही चाहा था कि आदम निकले

हम समझते रहे जिस शख़्स को महरम अपना
क्या सितम है वो किसी और का महरम निकले

हज़रत-ए-मजनूँ जो इक बार ब-नाम-ए-लैला
एड़ियाँ रगड़े अगर दश्त में ज़मज़म निकले

जिन को आता ही नहीं था कभी रोना वो भी
उन के कूचे से जूँही निकले तो पुर-नम निकले

एक तो ग़ैर से थे उन के मरासिम उस पर
सिलसिले उन के मरासिम के भी पैहम निकले