उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhin pher loge jo humse nigahen

तुम्हीं फेर लोगे जो हम से निगाहें

تمہیں پھیر لو گے جو ہم سے نگاہیں

शायर: Sabir Abuhari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हीं फेर लोगे जो हम से निगाहें
मिलेंगी कहाँ ग़म-ज़दों को पनाहें

बशर नापता है सितारों की राहें
उसे ले न डूबें ये परवाज़-गाहैं

तलातुम से कब डूबते हैं सफ़ीने
अगर डूबते दिल डुबोना न चाहें

ठहरती हैं गुल पर न शम्स-ओ-क़मर पर
न जाने किसे ढूँढती हैं निगाहें

उन्हें मिल गया नाम दैर-ओ-हरम का
जो इंसानियत की हैं क़ुर्बान-गाहें

नहीं कोई उम्मीद हम को वफ़ा की
जफ़ा ही सही आप कुछ तो निबाहें

जुनूँ ही यहाँ काम आए तो आए
बहुत पुर-ख़तर हैं मोहब्बत की राहें

मिरी काएनात-ए-मोहब्बत है 'साबिर'
यही चंद आँसू यही चंद आहें