उर्दू शायरी · ग़ज़ल

adu ho gaya aadmi aadmi ka

अदू हो गया आदमी आदमी का

عدو ہو گیا آدمی آدمی کا

शायर: Sabir Abuhari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अदू हो गया आदमी आदमी का
अजब दौर है ये नई रौशनी का

उलझते हैं नस्ली-तनाफ़ुर में इंसाँ
मिटा कर न रख दें ये नाम आदमी का

बस इक साँस है आए आए न आए
भरोसा नहीं है कोई ज़िंदगी का

कुदूरत को छोड़ो मोहब्बत बढ़ाओ
ये दुनिया है मेला घड़ी दो घड़ी का

फ़रिश्तों से निस्बत मुझे देने वालो
नहीं जानते तुम मक़ाम आदमी का

ग़म-ए-ला-ज़वाल इक अता कर के मुझ को
अदा कर दिया तू ने हक़ दोस्ती का

जो साक़ी की ख़ातिर ही पी लूँ तो पी लूँ
नहीं शौक़ वर्ना मुझे मय-कशी का

बड़ी चीज़ है मेहर-ओ-उल्फ़त भी 'साबिर'
इसी में है पोशीदा गौहर ख़ुशी का