उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aashiyane ki jab bhi yaad aai

आशियाने की जब भी याद आई

آشیانے کی جب بھی یاد آئی

शायर: Sabir Abuhari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आशियाने की जब भी याद आई
एक बिजली सी दिल में लहराई

यूँ भी देखा गया है महफ़िल में
वो तमाशा थे हम तमाशाई

तेरे आँचल का जिस पे साया हो
उस गदा पर निसार दाराई

हम ने दामन ही जा लिया उन का
लोग करते रहे जबीं-साई

माह-ओ-अंजुम में लाला-ओ-गुल में
हम को तेरी झलक नज़र आई

दोस्त आए थे मुझ को समझा ने
हाल देखा तो आँख भर आई

छा गईं मस्तियाँ फ़ज़ाओं में
तेरे दामन की जब हवा आई

जो मोहब्बत में मिट गया 'साबिर'
उस ने मर कर भी ज़िंदगी पाई