उर्दू शायरी · ग़ज़ल

banaya tha KHirad ko rahnuma-e-karwan humne

बनाया था ख़िरद को रहनुमा-ए-कारवाँ हम ने

بنایا تھا خرد کو رہنمائے کارواں ہم نے

शायर: Sabir Abuhari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बनाया था ख़िरद को रहनुमा-ए-कारवाँ हम ने
कहाँ की मंज़िल अपना भी न पाया कुछ निशाँ हम ने

तसव्वुर का तकल्लुफ़ भी न रक्खा दरमियाँ हम ने
हिजाबों का मिटा कर रख दिया नाम-ओ-निशाँ हम ने

वहाँ रूदाद-ए-ग़म पलकों पे आ कर कह गए आँसू
जहाँ खोली न पास-ए-ज़ब्त से अपनी ज़बाँ हम ने

तुझे क्यों दुश्मनी है बाग़बाँ इन चंद तिनकों से
बनाया है तिरे गुलशन से हट कर आशियाँ हम ने

करिश्मा है किसी के हुस्न की सेहर-आफ़रीनी का
ख़िज़ाँ के भेस में पाया बहारों को निहाँ हम ने

रह-ए-हस्ती की ज़ुल्मत में जुदा जब हो गए रहबर
बनाया जज़्ब-ए-दिल को रहनुमा-ए-कारवाँ हम ने

ग़ुलामी के अंधेरे छट गए मुद्दत हुई लेकिन
न देखा मेहर-ए-आज़ादी को अब तक ज़ौ-फ़िशाँ हम ने

किया दुनिया में हम ने 'आम दस्तूर-ए-वफ़ा 'साबिर'
सिखाई अहल-ए-'आलम को मोहब्बत की ज़बाँ हम ने