उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya mein nam ko bhi mohabbat nahin rahi

दुनिया में नाम को भी मोहब्बत नहीं रही

دنیا میں نام کو بھی محبت نہیں رہی

शायर: Sabir Abuhari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया में नाम को भी मोहब्बत नहीं रही
इंसान की वो पहली सी फ़ितरत नहीं रही

बे-हुरमती-ए-हज़रत-ए-आदम को देख कर
अपने तो दिल में हसरत-ए-जन्नत नहीं रही

हासिल उसे मक़ाम फ़रिश्तों का था कभी
सद-हैफ़ आदमी की वो अज़्मत नहीं रही

आतश-बजाँ है बर्क़-ए-तपाँ किस के वास्ते
हम आशियाँ बनाएँ ये हसरत नहीं रही

अपनों का लुत्फ़ जौर-ए-मुसलसल से कम नहीं
ग़ैरों से हम को कोई शिकायत नहीं रही

'साबिर' किसी की याद में ख़ुद को भुला सकें
कार-ए-जहाँ से इतनी भी फ़ुर्सत नहीं रही