उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaari yaad mein aankhen bhigo raha hun main

तुम्हारी याद में आँखें भिगो रहा हूँ मैं

تمہاری یاد میں آنکھیں بھگو رہا ہوں میں

शायर: Dard Faiz Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारी याद में आँखें भिगो रहा हूँ मैं
मगर ज़माना समझता है रो रहा हूँ मैं

कमाल ये है कि ख़ुद अपने दिल के तारों में
हसीन इश्क़ के मोती पिरो रहा हूँ मैं

कटी है उम्र ये सारी बुतों की उल्फ़त में
मगर अब अपने गुनाहों को धो रहा हूँ मैं

मिरे यक़ीन का इस से ही इम्तिहाँ होगा
भँवर में इश्क़ के कश्ती डुबो रहा हूँ मैं

मिले तो उस को निशानी वो दूँ मोहब्बत की
उठा के शाने पे अपने जो ढो रहा हूँ मैं

ख़याल-ए-आबला-पाई है हर क़दम मुझ को
सो अपनी राह में काँटे भी बो रहा हूँ मैं

लगा रहे हैं वो मेहंदी ख़ुशी की हाथों में
सुकून दिल का मगर 'फ़ैज़' खो रहा हूँ मैं