उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne KHud apni mohabbat ka gala ghonT diya

हम ने ख़ुद अपनी मोहब्बत का गला घोंट दिया

ہم نے خود اپنی محبت کا گلا گھونٹ دیا

शायर: Dard Faiz Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने ख़ुद अपनी मोहब्बत का गला घोंट दिया
दिल से उठती हुई चाहत का गला घोंट दिया

जो थी सच्चाई वो ज़ाहिर ही नहीं हो पाई
इक फ़साने ने हक़ीक़त का गला घोंट दिया

हक़-बयानी के लिए जब वो हुआ महव-ए-कलाम
इक सुख़नवर ने सियासत का गला घोंट दिया

बस यहाँ देना था पैग़ाम-ए-मोहब्बत लेकिन
किस क़दर सब ने रिवायत का गला घोंट दिया

कामयाबी भी क़दम उस के ही चूमेगी यहाँ
जिस ने ख़ुद अपनी ज़रूरत का गला घोंट दिया

ख़ाना-ए-दिल में सदा जिस को बसाया मैं ने
उस ने ही मेरी मसर्रत का गला घोंट दिया

दिल का हर दर्द था सर्माया-ए-हस्ती लेकिन
'फ़ैज़' ने अपनी ही उल्फ़त का गला घोंट दिया