उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat mein koi aashiq agar fankar ban jae

मोहब्बत में कोई आशिक़ अगर फ़नकार बन जाए

محبت میں کوئی عاشق اگر فن کار بن جائے

शायर: Dard Faiz Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत में कोई आशिक़ अगर फ़नकार बन जाए
तो फिर ये ऐन मुमकिन है कि दिल बाज़ार बन जाए

तिरी राहें तिरा कूचा अगर घर-बार बन जाए
तिरी हसरत में जो मर जाए वो मे'मार बन जाए

वो साहिर जो बना देता है पत्थर सब दिवानों को
है मुमकिन उस की लाठी भी कभी तलवार बन जाए

ज़रा सी देर बस आ जा मिरे दीदार की ख़ातिर
कहीं ऐसा न हो ये जिस्म भी मुर्दार बन जाए

मुझे कुछ भी नहीं कहना फ़क़त ख़ामोश रहना है
न जाने कब मिरे हाथों कोई शहकार बन जाए

फ़ना हो जाएँगे इक रोज़ दुनिया के सभी ज़ालिम
हमारा इक मुजाहिद सा अगर किरदार बन जाए

ख़ुदारा 'फ़ैज़' को इतनी नहीं दौलत अता करना
कहीं ऐसा न हो भाई मिरा ग़द्दार बन जाए