उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni duniya basa raha hun main

अपनी दुनिया बसा रहा हूँ मैं

اپنی دنیا بسا رہا ہوں میں

शायर: Dard Faiz Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी दुनिया बसा रहा हूँ मैं
जा तुझे अब भुला रहा हूँ मैं

आज की शब बड़ी क़यामत है
वाक़ई सोने जा रहा हूँ मैं

हाँ मोहब्बत कभी नहीं मिटती
ख़ुद को लेकिन मिटा रहा हूँ मैं

उस की ख़ुशियों के वास्ते लोगो
बार-ए-ग़म भी उठा रहा हूँ मैं

या-ख़ुदा सुन ले इल्तिजा मेरी
दर तिरा खटखटा रहा हूँ मैं

ये धुआँ बे-सबब नहीं उठता
अपना सीना जला रहा हूँ मैं

'फ़ैज़' उर्दू अदब की दुनिया में
अपना जल्वा दिखा रहा हूँ मैं