उर्दू शायरी · ग़ज़ल

daman-e-gul mein wo thi ashk-fishani ki tarah

दामन-ए-गुल में वो थी अश्क-फ़िशानी की तरह

دامن گل میں وہ تھی اشک فشانی کی طرح

शायर: Dard Faiz Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दामन-ए-गुल में वो थी अश्क-फ़िशानी की तरह
मैं ने चाहा था जिसे रात की रानी की तरह

मिस्ल-ए-ख़्वाहिश जिन्हें मैं रखता हूँ अफ़सोस कि वो
मेरी यादें भी नहीं रखते निशानी की तरह

उस को समझाऊँ तो कैसे जो रहा दिल में मिरे
न ही अल्फ़ाज़ की सूरत न मआ'नी की तरह

फ़न का दावा वो किया करते हैं हैरत है मुझे
'ग़ालिब'-ओ-'ज़ौक़' के जैसे हैं न 'फ़ानी' की तरह

कर्बला में जो मदीने के मुसाफ़िर पहोंचे
ख़ून फिर उन का बहाया गया पानी की तरह

'फ़ैज़' ग़ज़लों को सलीक़े से सँवारा मैं ने
मेरा हर शेर है दरिया की रवानी की तरह