उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din kaThin jaise hai sitaron par

दिन कठिन जैसे है सितारों पर

دن کٹھن جیسے ہے ستاروں پر

शायर: Dard Faiz Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन कठिन जैसे है सितारों पर
रात भारी है बे-क़रारों पर

तुझ को मालूम क्यों नहीं पड़ता
क्या गुज़रती है सोगवारों पर

कर ले तस्ख़ीर तू ज़मीं अपनी
है नज़र मेरी चाँद तारों पर

नाचता है जो नाचे जी-भर के
मैं नहीं नाचता इशारों पर

जिस को जल्वा तिरा मयस्सर हो
क्यों नज़र डाले वो नज़ारों पर

जिन को समझा था ना-ख़ुदा मैं ने
वो खड़े रह गए किनारों पर

'फ़ैज़' कोई नहीं मिला करता
इश्क़ चलता है बस ख़सारों पर