उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hunar jab fan mein Dhalta hai baDi taklif hoti hai

हुनर जब फ़न में ढलता है बड़ी तकलीफ़ होती है

ہنر جب فن میں ڈھلتا ہے بڑی تکلیف ہوتی ہے

शायर: Dard Faiz Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुनर जब फ़न में ढलता है बड़ी तकलीफ़ होती है
रगों का ख़ून जलता है बड़ी तकलीफ़ होती है

ग़ज़ल-गोई को क्या तुम ने बहुत आसान समझा है
जब इस में दिल पिघलता है बड़ी तकलीफ़ होती है

जो शब-बेदार होते हैं ये उन के दिल से पूछो तुम
कि जब सूरज निकलता है बड़ी तकलीफ़ होती है

चमन के सारे फूलों से मोहब्बत है मुझे लेकिन
कोई उन को मसलता है बड़ी तकलीफ़ होती है

जिसे दिल में बसा के हम ने पलकों पर सजाया था
वो ही अरमाँ कुचलता है बड़ी तकलीफ़ होती है

उन्हें बातों ही बातों में हम अक्सर छू तो लेते हैं
मगर जब हाथ जलता है बड़ी तकलीफ़ होती है

सुनहरी धूप में हम 'फ़ैज़' उस के साथ रहते हैं
मगर जब वक़्त ढलता है बड़ी तकलीफ़ होती है