उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum na aaoge to kya ho jaega

तुम न आओगे तो क्या हो जाएगा

تم نہ آؤ گے تو کیا ہو جائے گا

शायर: Sabir Abuhari11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम न आओगे तो क्या हो जाएगा
दर्द ख़ुद बढ़ कर दवा हो जाएगा

जो ख़ुदी से आश्ना हो जाएगा
महरम-ए-राज़-ए-बक़ा हो जाएगा

क्या पिलाओगे किसी सुक़रात को
ज़हर तो आब-ए-बक़ा हो जाएगा

हम करेंगे जब नवा-ए-हक़ बुलंद
इक ज़माना हम-नवा हो जाएगा

पारसाई देखती रह जाएगी
बाब-ए-रहमत हम पे वा हो जाएगा

शौक़-ए-मंज़िल शर्त है ऐ राह-रौ
ज़र्रा ज़र्रा रहनुमा हो जाएगा

बारगाह-ए-हुस्न पर कर दो निसार
ज़िंदगी का हक़ अदा हो जाएगा

नाज़ क्या है ज़िंदगी के साज़ पर
एक दिन ये बे-सदा हो जाएगा

हम ने पूजा था किसी को प्यार से
क्या ख़बर थी वो ख़ुदा हो जाएगा

इफ़्फ़त-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र पैदा तो कर
हुस्न मजबूर-ए-वफ़ा हो जाएगा

काम ले 'साबिर' तू सब्र-ओ-शुक्र से
उस की जो होगी रज़ा हो जाएगा