उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumko wahshat to sikha di hai guzare laiq

तुम को वहशत तो सिखा दी है गुज़ारे लाइक़

تم کو وحشت تو سکھا دی ہے گزارے لائق

शायर: Umair Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम को वहशत तो सिखा दी है गुज़ारे लाइक़
और कोई हुक्म कोई काम हमारे लाइक़

मा'ज़रत मैं तो किसी और के मसरफ़ में हूँ
ढूँढ देता हूँ मगर कोई तुम्हारे लाइक़

घोंसला छाँव हरा रंग समर कुछ भी नहीं
देख मुझ जैसे शजर होते हैं आरे लाइक़

एक-दो ज़ख़्मों की गहराई और आँखों के खँडर
और कुछ ख़ास नहीं मुझ में नज़ारे लाइक़

इस 'इलाक़े में उजालों की जगह कोई नहीं
सिर्फ़ परचम है यहाँ चाँद सितारे लाइक़

मुझ निकम्मे को चुना उस ने तरस खा के 'उमैर'
देखते रह गए हसरत से बिचारे लाइक़