उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe na aaengi muflis ki mushkilat samajh

तुझे न आएँगी मुफ़्लिस की मुश्किलात समझ

تجھے نہ آئیں گی مفلس کی مشکلات سمجھ

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे न आएँगी मुफ़्लिस की मुश्किलात समझ
मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूँ बात समझ

मिरे 'अलावा हैं छे लोग मुनहसिर मुझ पर
मिरी हर एक मुसीबत को ज़र्ब सात समझ

फ़लक से कट के ज़मीं पर गिरी पतंगें देख
तू हिज्र काटने वालों की नफ़्सियात समझ

शुरू' दिन से उधेड़ा गया है मेरा वुजूद
जो दिख रहा है उसे मेरी बाक़ियात समझ

किताब-ए-'इश्क़ में हर आह एक आयत है
और आँसुओं को हुरूफ़‌‌‌‌-ए-मुक़त्ति’आत समझ

करें ये काम तो कुंबे का वक़्त कटता है
हमारे हाथों को घर की घड़ी के हाथ समझ

दिल-ओ-दिमाग़ ज़रूरी हैं ज़िंदगी के लिए
ये हाथ-पाँव इज़ाफ़ी सहूलियात समझ