उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe aaj ranj-o-malal kyon

तुझे आज रंज-ओ-मलाल क्यों

تجھے آج رنج و ملال کیوں

शायर: Umood Abrar Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे आज रंज-ओ-मलाल क्यों
उसे खो दिया तो सवाल क्यों

रग-ए-जाँ को इतना हिसाब है
शब-ए-फुर्क़तों में मलाल क्यों

वो जो मेरी जाँ से क़रीब हैं
यहाँ उन दिनों पे सवाल क्यों

तिरे बा'द तेरे ख़याल में
हुआ उतना जीना मुहाल क्यों

जिसे भूल कर मैं गुज़र गई
उसे आया मेरा ख़याल क्यों

मिरी बात मानो ठहर तो लो
यहाँ नफ़रतों में जलाल क्यों

है ये चार दिन की तो ज़िंदगी
खड़ा हो गया है वबाल क्यों