उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhko takta rahta hun

तुझ को तकता रहता हूँ

تجھ کو تکتا رہتا ہوں

शायर: Umar Farhat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ को तकता रहता हूँ
मैं भी तेरे जैसा हूँ

वो मिट्टी हो जाता है
जिस को हाथ लगाता हूँ

मैं मिट्टी के ख़्वाबों से
इश्क़ बना के बैठा हूँ

आप को छाँव मुबारक हो
मैं तो पेड़ उगाता हूँ

मैं काँच का छोटा सा घर
किस के लिए बनाता हूँ

कोई मुझ से बात करे
हर इक का मुँह तकता हूँ

तुम ही तुम तो होते हो
जब मैं ख़ुद में होता हूँ