उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhko hi wada wafa karne mein dushwari hai

तुझ को ही वा'दा वफ़ा करने में दुश्वारी है

تجھ کو ہی وعدہ وفا کرنے میں دشواری ہے

शायर: Faiyyaz Bostan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ को ही वा'दा वफ़ा करने में दुश्वारी है
मेरी तो शाम-ए-मुलाक़ात की तय्यारी है

ऐ मिरे ख़ाक के फूल ऊँचे सुरों में न महक
ऐसा लगता है मुझे साँस की बीमारी है

और भी चीज़ें कई मुझ में बुरी हैं लेकिन
सर-ए-फ़िहरिस्त ये बे-मौसमी बेज़ारी है

सादा-दिल हूँ सो तुझे तेरी रज़ा पर छोड़ा
ये मिरा हुस्न-ए-तलब है मिरी 'अय्यारी है

सीने की वादी में नाख़ुन ने उगाए हैं गुलाब
बाग़ों पर ता'ना-ज़न इक मिटती हुई क्यारी है