उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tol lekin dekh mujh mein nam izafi hai bhai

तोल लेकिन देख मुझ में नम इज़ाफ़ी है भई

تول لیکن دیکھ مجھ میں نم اضافی ہے بھئی

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तोल लेकिन देख मुझ में नम इज़ाफ़ी है भई
इस को मिन्हा कर के लिख जो वज़्न साफ़ी है भई

मैं अकेला ढो रहा हूँ बोझ दुहरे हिज्र का
ये अधूरे 'इश्क़ की पूरी तलाफ़ी है भई

लफ़्ज़ रेशों की तरह बुनना है शामिल ख़ून में
मेरे आबा का हुनर क़ालीन बाफ़ी है भई

उस क़दर रो जिस क़दर बनता है ग़म का अस्ल ज़र
सूद तो वैसे भी मज़हब के मुनाफ़ी है भई

आदमी के साथ क्या करती है कमबख़्त आगही
आइना देखा अभी तौबा मु'आफ़ी है भई

इतनी वहशत जज़्ब करते सैंकड़ों लग जाएँगे
हाँ अगर मुझ सा हो तो इक-आध काफ़ी है भई

वो ज़ियादा से ज़ियादा क्या करेगा देख लूँ
तजरबाती क़िस्म की वा'दा-ख़िलाफ़ी है भई