उर्दू शायरी · ग़ज़ल

toDi gai na ek riwayat na mil sake

तोड़ी गई न एक रिवायत न मिल सके

توڑی گئی نہ ایک روایت نہ مل سکے

शायर: Maham Haya Safdar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तोड़ी गई न एक रिवायत न मिल सके
हम भी ख़िलाफ़-ए-रस्म-ए-मोहब्बत न मिल सके

अल्लह करे बयान न कर पाओ दर्द-ए-दिल
अल्लह करे तुम्हें ये सुहूलत न मिल सके

तीमारदार आए ब-वक़्त-ए-विदा'-ए-जाँ
बीमार को प साँस की मोहलत न मिल सके

मक़्बूल हो न पाए दु'आ उस की एक भी
इक हिज्र-ज़ाद को शब-ए-वसलत न मिल सके

रख़्त-ए-सफ़र को बाँध के आमादा हो कोई
लेकिन रवानगी की इजाज़त न मिल सके

हम से ज़रूरतों की न तख़सीस हो सकी
हम तो किसी से हस्ब-ए-ज़रूरत न मिल सके

वो शख़्स भी मिला न हमें इस तरह 'हया'
जैसे किसी को काम की उजरत न मिल सके