उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghair hum ko kahan gawara hai

ग़ैर हम को कहाँ गवारा है

غیر ہم کو کہاں گوارا ہے

शायर: Maham Haya Safdar9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ैर हम को कहाँ गवारा है
जो हमारा है बस हमारा है

मेरी दुनिया में रौशनी का सबब
एक चेहरा है इक सितारा है

मैं तुझे कैसे छोड़ सकती हूँ
तू मिरा आख़िरी सहारा है

आप बे-वज्ह याद आए हैं
आप को बे-सबब पुकारा है

साथ रहते तो ठीक था लेकिन
आख़िरी फ़ैसला तुम्हारा है

हम ने इक शख़्स की तमन्ना में
कुल जहान-ए-नशात हारा है

पूछता ही नहीं कोई अब तो
मरने वाले को किस ने मारा है

रूह सरशार होती है सुन के
आप का नाम कितना प्यारा है

हम ने देखा है बारहा चख के
अश्क का ज़ाइक़ा तो खारा है