उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ahl-e-wafa ke waste rah-e-wafa banai thi

अहल-ए-वफ़ा के वास्ते राह-ए-वफ़ा बनाई थी

اہل وفا کے واسطے راہ وفا بنائی تھی

शायर: Maham Haya Safdar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अहल-ए-वफ़ा के वास्ते राह-ए-वफ़ा बनाई थी
मैं वो हूँ जिस ने शहर की आब-ओ-हवा बनाई थी

वर्ना तो बज़्म-ए-'इश्क़ में रस्म-ए-कलाम ही न थी
मैं ने तुम्हारे वास्ते फिर भी सदा बनाई थी

मुझ को चमक से 'इश्क़ था उस को थी तीरगी पसंद
मैं ने दिया बना लिया उस ने हवा बनाई थी

शिकवा ही क्या हो ग़ैर से जिस को कोई ख़बर न थी
तुम तो थे दर्द-आश्ना तुम ने दवा बनाई थी

सदक़े में उस तबीब के जिस ने कभी मिरे लिए
ख़ाक-ए-दर-ए-हबीब से ख़ाक-ए-शिफ़ा बनाई थी

मैं ने ज़मीं के हाथ को बेलों से भर दिया 'हया'
मैं ने लहू की धार से ताज़ा हिना बनाई थी