उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek safar ka nishan baqi hai

इक सफ़र का निशान बाक़ी है

اک سفر کا نشان باقی ہے

शायर: Maham Haya Safdar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक सफ़र का निशान बाक़ी है
दश्त में कारवान बाक़ी है

फैलने को है सनसनी कोई
बैठिए दास्तान बाक़ी है

सख़्त ख़तरा है मुझ को दुश्मन से
मेरा इक राज़-दान बाक़ी है

इस तसलसुल से उस को देखा था
आँख में भी थकान बाक़ी है

क्या नया 'इश्क़ हो कि दिल में दोस्त
ख़्वाहिश-ए-रफ़्तगान बाक़ी है

ग़ैर से रब्त बे-रुख़ी दूरी
कौन सा इम्तिहान बाक़ी है

शुक्र लाज़िम है ऐ ज़मीं-ज़ादो
सर पे गर आसमान बाक़ी है