उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri mahak ne hi tera pata diya hai mujhe

तिरी महक ने ही तेरा पता दिया है मुझे

تری مہک نے ہی تیرا پتہ دیا ہے مجھے

शायर: Aarib Hashmi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी महक ने ही तेरा पता दिया है मुझे
ख़ुदा का शुक्र कि तुझ से मिला दिया है मुझे

मैं एक तीर था उस की कमाँ में रखा हुआ
और उस ने यूँही हवा में चला दिया है मुझे

किसी की आँखें सजाई थी मेरे चेहरे पर
किसी का ख़्वाब था लेकिन दिखा दिया है मुझे

मिला के ख़ाक समंदर के खारे पानी में
घुमा के चाक अचानक बना दिया है मुझे

'अजीब 'इश्क़ था जिस ने नुमूद करते वक़्त
हटा दिया है जुनूँ और बढ़ा दिया है मुझे

शब-ए-फ़िराक़ में उस को भुला के सोया था
पर उस ने ख़्वाब में आ कर जगा दिया है मुझे

मैं जानता हूँ वो मेरे लिए बना ही नहीं
मैं सोचता हूँ मोहब्बत ने क्या दिया है मुझे

मेरी गिरफ़्त में आता नहीं बदन उस का
ये किस ख़याल के पीछे लगा दिया है मुझे

फिर उस की आँख में आँसू हैं किस लिए 'आरिब'
वो जिस को ज़ो'म था यकसर भुला दिया है मुझे