उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri KHidmat mein baiThe hue hain

तिरी ख़िदमात में बैठे हुए हैं

تری خدمات میں بیٹھے ہوئے ہیں

शायर: Ujjawal Vashishtha7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी ख़िदमात में बैठे हुए हैं
कि सब औक़ात में बैठे हुए हैं

छुपाना चाहते हैं अपने आँसू
सो हम बरसात में बैठे हुए हैं

बहुत दुश्वार है घर से निकलना
अदू सब घात में बैठे हुए हैं

हमारे नाम में जितने हैं अक्षर
तिरी हर बात में बैठे हुए हैं

परिंदों घोंसलों में रहना अपने
शिकारी घात में बैठे हुए हैं

हमारे पीछे चलते थे कभी जो
अब उन के साथ में बैठे हुए हैं

तलाश-ए-आफ़्ताब-ए-इश्क़ में सब
अँधेरी रात में बैठे हुए हैं