उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mubarak hon tujhe KHairaat ke gul

मुबारक हों तुझे ख़ैरात के गुल

مبارک ہوں تجھے خیرات کے گل

शायर: Ujjawal Vashishtha7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुबारक हों तुझे ख़ैरात के गुल
खिलेंगे फिर मिरे हालात के गुल

कोई तो जीत कर भी ख़ुश नहीं है
किसी को भा रहे हैं मात के गुल

अभी जुमलों में उन के है शरारत
अभी ताज़ा हैं कुछ जज़्बात के गुल

दुआ गो हैं कई हंसों के जोड़े
खिला दे या ख़ुदा बरसात के गुल

तुम्हारी ख़ुशबुएँ पहचानता हूँ
ये लगते हैं तुम्हारे हाथ के गुल

अभी हर हुक्म माना जा रहा है
अभी ताज़ा हैं मेरी बात के गुल

उन्हें कैसे नज़र-अंदाज़ कर दूँ
जो तुम ने भेजे है सौग़ात के गुल