उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahin to ho taraf-dari hamari

कहीं तो हो तरफ़-दारी हमारी

کہیں تو ہو طرف داری ہماری

शायर: Ujjawal Vashishtha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहीं तो हो तरफ़-दारी हमारी
कभी तो पीठ हो भारी हमारी

तुम्हारी गुफ़्तुगू से लग रहा है
है ख़ुशबू जानी-पहचानी हमारी

इसी उम्मीद पर ज़िंदा हैं आँखें
कभी तो आएगी बारी हमारी

अभी है खेल में मिलना बिछड़ना
कहाँ तक जाएगी पारी हमारी

ज़मीं की छाँव सब तुम को मुबारक
चलो जो धूप है सारी हमारी